AMF WEBSITE PRELOADER

राज कपूर 100 वर्ष सेलिब्रेशन | AMF

Abhigyan Ashish Mishra 3 min read
राज कपूर 100 वर्ष सेलिब्रेशन | AMF

राज कपूर भारतीय सिनेमा के महानतम फिल्म निर्माताओं और अभिनेताओं में से एक थे। उनका जीवन संघर्ष, सफलता और भारतीय सिनेमा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। आइए उनके जीवन का विवरण समझते हैं। जन्म और परिवार राज कपूर का जन्म 14 दिसंबर 1924 को पेशावर (अब पाकिस्तान में) में एक पंजाबी खत्री परिवार में हुआ। उनका पूरा नाम रणबीर राज कपूर था। वे भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे। कपूर परिवार भारतीय सिनेमा का सबसे प्रसिद्ध फिल्मी परिवार माना जाता है। राज कपूर के छोटे भाई शम्मी कपूर और शशि कपूर भी प्रसिद्ध अभिनेता थे। फिल्मी करियर की शुरुआत राज कपूर नेअपने करियर की शुरुआत 1944 में बतौर क्लैपर बॉय (फिल्म‘बॉम्बे टॉकीज’) से की। उनके करियर की पहली बड़ी फिल्म नीलकमल (1947)थी, जिसमें उन्होंने मधुबाला के साथ अभिनय किया।

1948 में मात्र 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने आर.के. फिल्म्स नामक अपना प्रोडक्शन हाउस स्थापित किया और उसी वर्ष फिल्म आग का निर्देशन और निर्माण किया। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई, लेकिन राज कपूर का निर्देशन कौशल सामने आया। सफलता की बुलंदियां

राज कपूर ने 1950 और 1960 के दशक में कई शानदार फिल्में बनाईं, जिनमें सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को दर्शाया गया। उनकी फिल्मों में चार्ली चैपलिन की शैली का प्रभाव दिखाई देता है। आवारा (1951) इस फिल्म ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। श्री 420 (1955) गीत "मेरा जूता है जापानी" ने वैश्विक लोकप्रियता पाई।

संगम (1964)रंगीन फिल्म निर्माण की शुरुआत।

पारिवारिक जीवन राज कपूर ने कृष्णा मल्होत्रा से शादी की,और उनके पाँच बच्चे हुए

रणधीर कपूर,ऋषि कपूर,राजीव कपूर,रीमा जैन

ऋतु नंदा उनके बेटे रणधीर, ऋषि और राजीव कपूर ने भी बॉलीवुड में नाम कमाया।बाद का समय और मृत्यु राज कपूर का स्वास्थ्य 1980 के दशक में बिगड़ने लगा। उन्होंने अपनी अंतिम फिल्म राम तेरी गंगा मैली (1985)बनाई, जो बेहद सफल रही। 2 जून 1988 को दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

राज कपूर की विरासत राज कपूर को "शोमैन ऑफ इंडियन सिनेमा" कहा जाता है। उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार और सम्मान मिले दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1987) राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पद्म भूषण राज कपूर की फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी और उनकी विरासत आज भी जीवित है। उनके निर्देशन और अभिनय की गहराई भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग को दर्शाती है।अभिप्राय मिडिया फाउंडेशन चेयरमैन फाउंडर अभिज्ञान आशीष मिश्रा ने लिखा राजकपूर के जन्म से लेकर उनके शुरू हुये फ़िल्मी सफर नामे मे राजकपूर के 100 वर्ष यू हुये पूरे जब कि फिल्मो के निर्माण मे कई फिल्मो मे सफलता मिली तो वहीं असफल भी रही फ़िल्मी जगत मे बहुत सारे उतार चढ़ाओ आते रहे तो भी वे महानतम फिल्मेकारों मे से एक थे उनकी फिल्मो से बहुत कुछ नये कला कारो कों ही नहीं नये निर्माताओ कों भी सिखने कों मिला आज भी राजकपूर की फिल्मो कों देख कर उनकी यादें ताज़ा हों जाति हैँ।

जीना यहाँ मरना यहाँ

इसके सिवा जाना कहाँ

जी चाहे जब हमको आवाज़ दो

हम हैं वहीं हम थे जहाँ

जीना यहाँ मरना यहाँ।

  • #wfwf