माँ सरस्वती हिन्दू धर्म में ज्ञान, विद्या, संगीत, कला और वाणी की देवी मानी जाती हैं। वे सृजन, विवेक और बुद्धि की प्रतीक हैं। हिन्दू धर्म के अलावा जैन और बौद्ध धर्म में भी उनकी पूजा की जाती है।
माँ सरस्वती का प्राकट्य (उत्पत्ति)माँ सरस्वती के प्रकट होने को लेकर कई मान्यताएँ हैं।
ब्रह्मा जी की शक्ति से उत्पत्ति-जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो उन्हें यह महसूस हुआ कि संसार में ज्ञान और वाणी का अभाव है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का,जिससे माँ सरस्वती प्रकट हुईं। समुद्र मंथन से उत्पत्ति – कुछ कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान माँ सरस्वती प्रकट हुईं और उन्हें विद्या, कला और संगीत का अधिष्ठान प्राप्त हुआ। सरस्वती नदी के रूप में-वैदिक काल में माँ सरस्वती को एक पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता था। ऋग्वेद में सरस्वती नदी का विशेष उल्लेख है। माँ सरस्वती की आराधना का प्रारंभ और इतिहास माँ सरस्वती की पूजा वैदिक काल से चली आ रही है। ऋग्वेद में उन्हें‘वाग्देवी (वाणी की देवी) कहा गया है। वैदिक काल (1500-500 ईसा पूर्व)-इस काल में सरस्वती नदी को दिव्य शक्ति के रूप में पूजा जाता था और माँ सरस्वती को ज्ञान और वाणी की देवी माना गया। गुप्त काल (4वीं-6वीं शताब्दी) इस समय मूर्तिपूजा का विस्तार हुआ और माँ सरस्वती की मूर्तियों की स्थापना की गई। मध्यकाल (7वीं-15वीं शताब्दी) इस काल में संस्कृत साहित्य और कला का विकास हुआ,जिससे माँ सरस्वती की उपासना विशेष रूप से होने लगी। बसंत पंचमी और माँ सरस्वती की पूजा का महत्व बसंत पंचमी हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन माँ सरस्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है। बसंत पंचमी का महत्व ज्ञान और शिक्षा का पर्व-इस दिन बच्चे विद्यारंभ (अक्षर लेखन) करते हैं।विद्यार्थियों के लिए विशेष दिन-स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में माँ सरस्वती की पूजा होती है।संगीत और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संगीतकार और कलाकार इस दिन अपने वाद्ययंत्रों और कला सामग्री की पूजा करते हैं। बसंत ऋतु का स्वागत यह दिन वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है,जब प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। माँ सरस्वती को विद्या की देवी क्यों कहा जाता है? ज्ञान और विवेक की देवी-वे संसार में बौद्धिक प्रकाश लाती हैं। वाणी और वाक् शक्ति की अधिष्ठात्री-उनके आशीर्वाद से व्यक्ति में वाणी की मधुरता और प्रभावशीलता आती है। संगीत और कला की देवी-वे वीणा धारण करती हैं, जो संगीत और कला की प्रतीक है। वेदों में वर्णित-वेदों में उन्हें "वाग्देवी" और "ज्ञानस्वरूपा" के रूप में वर्णित किया गया है।भारत में प्रसिद्ध माँ सरस्वती के मंदिर और तीर्थ स्थल भारत में माँ सरस्वती के कई प्रमुख मंदिर और तीर्थ स्थल स्थित हैं।उत्तर भारत सरस्वती मंदिर,इलाहाबाद (उत्तरप्रदेश)-कुंभ मेले में विशेष रूप से पूजित स्थान। सरस्वती कूप, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)-इसे अदृश्य सरस्वती नदी का स्रोत माना जाता है। दक्षिण भारत मे श्री विद्या सरस्वती मंदिर,बसारा (तेलंगाना)-भारत का एक प्रसिद्ध सरस्वती मंदिर, जहाँ विद्यारंभ संस्कार किया जाता है। कोल्लुर मूकांबिका मंदिर (कर्नाटक)-यहाँ माँ सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती एकत्र पूजित हैं।सरस्वती मंदिर, कुम्भकोणम (तमिलनाडु) तमिलनाडु में विद्यार्थियों और कलाकारों द्वारा पूजित। गुजरात और राजस्थान सरस्वती मंदिर, सिद्धपुर (गुजरात)-यह स्थल ऐतिहासिक रूप से सरस्वती नदी के साथ जुड़ा हुआ है। अंबाजी मंदिर (गुजरात)-माँ सरस्वती की उपासना यहाँ भी होती है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (त्रिपुरा)-त्रिपुरा राज्य में माँ सरस्वती की पूजा का प्रमुख स्थान। राजराजेश्वरी मंदिर (पश्चिम बंगाल) यहाँ बसंत पंचमी के अवसर पर माँ सरस्वती की भव्य पूजा होती है। माँ सरस्वती की पूजा वैदिक काल से चली आ रही है। वे ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत और कला की देवी हैं। वसंत पंचमी को उनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि यह दिन शिक्षा, संगीत और कला के लिए शुभ माना जाता है। भारत में उनके कई प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं, जिनमें बसारा (तेलंगाना), कोल्लुर (कर्नाटक), प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) और सिद्धपुर (गुजरात) प्रमुख हैं। अभिप्राय मिडिया फाउंडेशन चेयरमैन फाउंडर अभिज्ञान आशीष मिश्रा द्वारा बसंत पांचमी के उपलक्ष मे माँ सरस्वती की आराधना कर देश वासियों कों शुभकामनायें दी और बताया की माँ सरस्वती वाणी, विद्या, ज्ञान की देवी है जिनकी आराधना नितांत आवश्यक प्रत्येक मनुष्य कों इनकी उपासना करना ही चाहिये ताकि अपने जीवन सुख शांति समृद्धि की प्राप्ति हों और ये सभी तभी हों पता है जब आपको ज्ञान की प्राप्ति हों अतः बिना ज्ञान के कुछ भी संभव नहीं है
सदैव आप हर कार्य सफलता मिले व माँ सरस्वती की कृपा बनी यही मगल कामना करता है अभिप्राय मिडिया फाउंडेशन।
Abhigyan Ashish Mishra
Founder & Chairman